नरसिंहपुर में श्वेत क्रांति, 61 ग्राम चयनित

आधुनिक श्वेत क्रांति: अब गांवों में बहेगी दूध की धारा
नरसिंहपुर के 61 ग्राम ‘क्षीर धारा ग्राम’ योजना के लिए चयनित

नरसिंहपुर। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने और पशुपालन को लाभ का स्थायी व्यवसाय बनाने के उद्देश्य से ‘क्षीर धारा ग्राम योजना 2026’ का शुभारंभ किया गया है। पशुपालन विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत जिले के चिन्हित 61 ग्रामों में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुओं के स्वास्थ्य सुधार के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा।
यह योजना प्रदेश स्तर पर शुरू की गई है और आगामी तीन वर्षों तक चरणबद्ध तरीके से संचालित होगी।

प्रथम चरण में 61 ग्राम चयनित
योजना के पहले चरण में जिले के 61 ग्रामों को शामिल किया गया है

लक्ष्य:

17,711 गौवंश
8,954 भैंसवंशीय पशु
इन सभी को योजना के दायरे में लाकर उनकी उत्पादकता बढ़ाई जाएगी। जिले के पशु चिकित्सा अधिकारी एवं क्षेत्रीय अधिकारी इस अभियान को धरातल पर उतारने के लिए सक्रिय रूप से तैनात किए गए हैं।

योजना का मूल मंत्र: नस्ल सुधार, स्वास्थ्य और पोषण
योजना का फोकस तीन मुख्य बिंदुओं पर रहेगा:
✔ नस्ल सुधार के लिए आधुनिक तकनीक
गांवों में पूर्णतः एआई (Artificial Insemination) तकनीक का उपयोग।
सॉर्टेड सीमेन के माध्यम से उच्च नस्ल की बछिया उत्पन्न करने पर जोर।
पशुपालकों को तकनीकी प्रशिक्षण एवं जागरूकता।
✔ बांझ निवारण और उपचार शिविर
चिन्हित ग्रामों में विशेष बांझ निवारण शिविर आयोजित होंगे।
पशुओं की उत्पादक क्षमता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक उपचार।
✔ 100% टीकाकरण अभियान
बीमारियों से बचाव हेतु शत-प्रतिशत टीकाकरण।
सघन बधियाकरण अभियान।
 
पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका

योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
जिला पंचायत CEO गजेंद्र नागेश ने सभी जनपद पंचायतों को निर्देश जारी किए हैं कि योजना के संचालन में कोई कोताही न बरती जाए।
विशेष रूप से:
आवारा पशुओं को ग्राम पंचायतों के सहयोग से गौशालाओं में स्थानांतरित करना।
ग्राम स्तर पर निगरानी और सहयोग सुनिश्चित करना।
 
हर पशु की होगी डिजिटल पहचान

पशुपालन विभाग के अधिकारी डॉ. सुनील बृजपुरिया के अनुसार:

“योजना के व्यवस्थित संचालन हेतु वार्षिक कैलेंडर तैयार किया गया है। वर्तमान में आधारभूत सर्वे ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों मोड में जारी है। सर्वे के बाद प्रत्येक पशु की ईयर टैगिंग की जाएगी, जिससे उसकी डिजिटल पहचान सुनिश्चित हो सके।”
इससे पशुओं का रिकॉर्ड, स्वास्थ्य इतिहास और उत्पादन क्षमता का सटीक डेटा उपलब्ध रहेगा।

स्वच्छता और अतिरिक्त आय पर भी जोर

योजना केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी।
गोबर एवं अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष ध्यान।
जागरूकता शिविर और संगोष्ठियां।
जैविक खाद एवं अन्य उत्पादों के माध्यम से अतिरिक्त आय के अवसर।

दुग्ध उत्पादन में नई पहचान की ओर

‘क्षीर धारा ग्राम योजना’ से न केवल पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि उन्नत और वैज्ञानिक पशुपालन के माध्यम से नरसिंहपुर जिला दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।
ग्रामीण विकास और आधुनिक तकनीक के समन्वय से यह पहल वास्तव में जिले में आधुनिक श्वेत क्रांति की नींव रख रही है।

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