थर्मल पावर प्लांट को लेकर पर्यावरण और प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
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| फाइल फोटो |
घंसौर क्षेत्र में संचालित थर्मल पावर प्लांट को लेकर स्थानीय स्तर पर पर्यावरण प्रदूषण और निगरानी की कमी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों का कहना है कि प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट और राख के कारण जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, हवा में उड़ती राख से सांस संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। वहीं, कुछ जल स्रोतों के दूषित होने से पशुओं और खेती पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि शिकायतों के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
पहले उठी आवाजें, अब क्यों सन्नाटा?
क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि जो लोग पहले इस मुद्दे को लेकर सक्रिय थे, वे अब सार्वजनिक रूप से कुछ कहने से बचते नजर आ रहे हैं। इसे लेकर विभिन्न अटकलें लगाई जा रही हैं, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जनता ने की पारदर्शी जांच की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। यदि पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
नागरिकों का मानना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन यह जनस्वास्थ्य और पर्यावरण की अनदेखी करके नहीं होना चाहिए।

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