देवेश पटले पर गंभीर आरोप: सांसद–विधायक निधि के कार्यों में अनियमितता का आरोप — किशोर समरीते




                   समरीते ने कहा — “150 करोड़ के कार्य नियम विरुद्ध तरीके से कराए गए, CBI जांच हो


लांजी। लांजी–किरनापुर क्षेत्र के पूर्व विधायक एवं संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष किशोर समरीते ने जिला परियोजना अधिकारी प्रदीप कौरव और बिरसा निवासी देवेश पटले पर सांसद निधि, विधायक निधि और मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना के कार्यों में अनियमितता के आरोप लगाए हैं।

पूर्व विधायक किशोर समरीते 

समरीते ने बताया कि उन्होंने मीडिया को एक सूची सौंपी है, जिसमें 9 सांसद निधि के कार्य, 114 मुख्यमंत्री अधोसंरचना के कार्य और 40 विधायक निधि के कार्य शामिल हैं। उनके अनुसार इन योजनाओं के लगभग 150 करोड़ रुपये के कार्य नियम विरुद्ध तरीके से कराए गए हैं।


समरीते ने दावा किया कि इन कार्यों को कराने के लिए संबंधित व्यक्ति द्वारा लगभग 40 प्रतिशत राशि अग्रिम कमीशन के रूप में दी गई हो सकती है, जो गंभीर जांच का विषय है।


उन्होंने कहा कि पूर्व सांसद ढालसिंह बिसेन के कार्यकाल में स्वीकृत राशि से स्वीकृत सड़क और पुलिया “जमीन पर दिखाई नहीं देती, केवल कागजों में मौजूद है”—ऐसा उनका आरोप है।


समरीते ने यह भी आरोप लगाया कि इन सभी कार्यों में


* स्टीमेट,

* ड्राइंग–डिज़ाइन,

* तकनीकी स्वीकृति,

* CVC गाइडलाइन 2007


का पालन नहीं किया गया।


उन्होंने सवाल उठाया कि “मुख्यमंत्री अधोसंरचना, सांसद निधि और विधायक निधि के 200 से अधिक कार्य एक ही व्यक्ति को किस आधार पर दिए गए?”


समरीते ने मांग की कि कलेक्टर को अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए इस पूरे मामले की CBI जांच की अनुशंसा केंद्र सरकार से करनी चाहिए



,तथा देवेश पटले द्वारा कथित तौर पर अर्जित 50 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की जानी चाहिए।


संबंधित पक्षों का पक्ष


इस मामले में जिला परियोजना अधिकारी प्रदीप कौरव, देवेश पटले या प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। उनका पक्ष प्राप्त होते ही समाचार अपडेट किया जाएगा।

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📌 NEWS DISCLAIMER

सभी आरोप सिर्फ शिकायतकर्ता/वक्ता के बयान पर आधारित हैं।
इनकी स्वतंत्र जांच एवं सत्यापन जारी है।

🔸 प्रशासन और संबंधित अधिकारियों का पक्ष मिलते ही अपडेट किया जाएगा।
🔸 मीडिया किसी भी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं करता।
🔸 दोष सिद्धि का अंतिम अधिकार केवल न्यायालय को है।



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