रामपायली में करोड़ों का विकास या पारदर्शिता पर सवाल? सूचना बोर्ड गायब, गुणवत्ता पर उठ रहे प्रश्न जनता जानना चाहती है—कहां और कितना खर्च हो रहा है?

REPORTER
By -
0
रामपायली / बालाघाट
 पर्यटन एवं संस्कृति विभाग द्वारा ऐतिहासिक नगरी रामपायली में इन दिनों करोड़ों रुपये की लागत से विकास एवं सौंदर्यीकरण कार्य तेजी से कराए जा रहे हैं। भारी-भरकम मशीनों की आवाज और निर्माण गतिविधियों के बीच क्षेत्र विकास की नई तस्वीर गढ़ता दिखाई दे रहा है, लेकिन इन परियोजनाओं पर पारदर्शिता का अभाव अब गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिन निर्माण कार्यों पर जनता के कर का करोड़ों रुपये खर्च किया जा रहा है, उनकी मूलभूत जानकारी आखिर आम नागरिकों से क्यों छिपाई जा रही है? अधिकांश निर्माण स्थलों पर परियोजना संबंधी सूचना बोर्ड तक नहीं लगाए गए, जबकि शासन के नियमानुसार प्रत्येक निर्माण स्थल पर कार्य का नाम, स्वीकृत राशि, कार्यदायी एजेंसी, तकनीकी अधिकारी, निर्माण अवधि और पूर्णता की तिथि स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होना आवश्यक है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि विकास कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ किए जा रहे हैं तो फिर सूचना सार्वजनिक करने में हिचकिचाहट क्यों? जनता का अधिकार है कि वह जाने उसके टैक्स का पैसा किस योजना में, कितनी लागत से और किस गुणवत्ता के साथ खर्च किया जा रहा है।
इधर, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ निर्माणों में पहली ही बारिश के बाद कमियां दिखाई देने लगी हैं, जिससे कार्यों की मजबूती और गुणवत्ता पर संदेह गहराने लगा है। यदि शुरुआती दौर में ही ऐसी स्थिति है तो भविष्य में इन परियोजनाओं की स्थायित्व पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
अब क्षेत्रवासियों की मांग है कि संबंधित विभाग तत्काल सभी निर्माण स्थलों पर सूचना बोर्ड लगाए, प्रत्येक परियोजना का पूरा विवरण सार्वजनिक करे और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराए। विकास केवल निर्माण कराने से नहीं, बल्कि पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही के साथ जनता का विश्वास जीतने से सिद्ध होता है। यही सुशासन की असली पहचान भी है।
Tags:

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*

3/related/default