दो लाख में ईमान गिरफ़्तार! “उदयपुरा की फाइल… भोपाल में खुली, और नोटों के साथ पकड़ा गया पूरा खेल!”

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मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहां उदयपुरा नगर परिषद से जुड़ा रिश्वत का मामला भोपाल में जाकर फूट पड़ा। यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि फाइलें चाहे उदयपुरा में अटकें, लेकिन खेल कहीं भी खुल सकता है।

आवेदक जयंत चतुर्वेदी, ‘नवीन बिल्डकॉम’ फर्म के संचालक, ने उदयपुरा क्षेत्र में बस स्टैंड और मेन रोड का सी.सी. निर्माण कार्य पूरा किया था। काम पूरा होने के बावजूद उनकी सिक्योरिटी डिपॉजिट (SD) और अनुभव प्रमाण पत्र जारी नहीं किए जा रहे थे। आरोप है कि इसके एवज में ₹5 लाख की रिश्वत मांगी जा रही थी।

मामले से परेशान होकर आवेदक ने भोपाल लोकायुक्त से शिकायत की। इसके बाद लोकायुक्त टीम ने रणनीति बनाकर 28 अप्रैल 2026 को भोपाल के 6 नंबर हॉकर्स कॉर्नर के पास ट्रैप लगाया। जैसे ही उपयंत्री दीपांशु पटेरिया ने ₹2 लाख की रिश्वत ली, टीम ने उसे मौके पर ही रंगे हाथ पकड़ लिया।

इस कार्रवाई में यह भी सामने आया कि सहायक ग्रेड-2 शंकर साहू भी इस पूरे मामले में शामिल था। दोनों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) और भारतीय न्याय संहिता 2023 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

यह मामला साफ दिखाता है कि उदयपुरा में बैठे अधिकारी कैसे आम लोगों के काम रोककर रिश्वत मांगते हैं, और भोपाल में आकर वही खेल बेनकाब हो जाता है। लोकायुक्त की यह कार्रवाई एक बड़ा संदेश है कि भ्रष्टाचार चाहे कहीं भी हो, पकड़ से बचना आसान नहीं।

अब सवाल यह है कि क्या ऐसी कार्रवाई के बाद सिस्टम सुधरेगा, या फिर कुछ दिनों बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा?


केके का सवाल:

“उदयपुरा में फाइल अटकी और भोपाल में पैसा पकड़ा गया—आखिर सिस्टम चलता कहां से है?”

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