रायसेन: जिन्नौर में राम प्राण प्रतिष्ठा यज्ञ महोत्सव की धूम, कृष्ण जन्मोत्सव पर झूम उठे श्रद्धालु; कथा व्यास ने दिया 'राममय' जीवन का संदेश

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रायसेन/गैरतगंज:
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले की गैरतगंज तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम जिन्नौर में इन दिनों भक्ति, ज्ञान और आध्यात्म की अविरल गंगा बह रही है। यहाँ आयोजित हो रहे भव्य 'राम परिवार प्राण प्रतिष्ठा यज्ञ महोत्सव' ने पूरे क्षेत्र के वातावरण को धर्ममय कर दिया है। यज्ञ महोत्सव के चतुर्थ दिवस पर अपार श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब कथा पंडाल में बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ 'कृष्ण जन्म उत्सव' मनाया गया। भगवान के अवतरण प्रसंग को सुनकर और मनमोहक झांकियों को देखकर उपस्थित सभी श्रद्धालु भक्ति भाव में गोते लगाते हुए झूम उठे। भजनों की धुन और जयकारों से पूरा जिन्नौर गांव गुंजायमान हो गया।

इस पावन अवसर पर व्यासपीठ पर विराजमान भागवत प्रवक्ता पंडित श्याम जी नागर ने कई मर्मस्पर्शी और ज्ञानवर्धक प्रसंगों का सजीव वर्णन किया। उन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से केवल पौराणिक कथाएं ही नहीं सुनाईं, बल्कि भगवान राम के जीवन चरित्र को वर्तमान सामाजिक और पारिवारिक परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए जीवन जीने की कला भी सिखाई। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए पंडित नागर ने कहा कि आज के टूटते परिवारों को बचाने के लिए राम के चरित्र को आत्मसात करना सबसे जरूरी है।



उन्होंने पारिवारिक रिश्तों की अहमियत समझाते हुए कहा कि घर में सास-बहू के बीच आपसी समझ और प्रेम होना चाहिए, पिता-पुत्र के बीच सम्मान और स्नेह का भाव होना चाहिए। परिवार में 'राम' जैसा प्रेम बना रहे, यही सुखी जीवन का आधार है। रामचरितमानस की प्रसिद्ध चौपाई "जहाँ सुमति तहँ संपति नाना, जहाँ कुमति तहँ बिपति निदाना" का उल्लेख करते हुए उन्होंने गहराई से समझाया कि जिस परिवार और गाँव में आपसी समझ, भाईचारा और एकता (सुमति) होती है, वहीं सुख, शांति और संपदा का वास होता है। इसके विपरीत, जहाँ कलह, क्लेश और द्वेष (कुमति) होता है, वहाँ विपत्तियाँ अपना स्थायी घर बना लेती हैं। जहाँ सुमति और प्रेम होता है, वहीं साक्षात प्रभु राम विराजमान होते हैं और वह गाँव व परिवार सदा खुशहाल रहता है।



कथा व्यास पंडित श्याम जी नागर ने उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि 'राम कथा' केवल एक श्रवण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमें सही मायनों में जीना सिखाती है। मनुष्य योनि में जन्म मिलना बड़े सौभाग्य की बात है और इस शरीर को पाकर भगवत कथा का श्रवण करना परम आवश्यक है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, "हम सनातनी हैं, और हमें अपने धर्म, संस्कृति और संस्कारों को जीवित रखने के लिए संतों के प्रवचनों और हरि कथा का निरंतर श्रवण करना चाहिए। यही इस मनुष्य शरीर की प्राप्ति का शुद्ध और परम उद्देश्य है।"

इस भव्य राम परिवार प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ को वैदिक मंत्रोच्चार और पूर्ण विधि-विधान के साथ संपन्न करवाने का मुख्य दायित्व उज्जैन से पधारे आचार्य वेद विभूषण पंडित बलराम जी नागर जी द्वारा निभाया जा रहा है। उनके कुशल मार्गदर्शन में विद्वान ब्राह्मणों द्वारा यज्ञ की आहुतियां डाली जा रही हैं। इस महायज्ञ और कथा ने जिन्नौर सहित आस-पास के कई गांवों के लोगों को धर्म और अध्यात्म के एक सूत्र में पिरोने का काम किया है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु यज्ञ शाला की परिक्रमा करने और कथा रूपी अमृत का पान करने पहुंच रहे हैं।

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