बरमान मेला शुभारंभ: नर्मदा स्वच्छता पर मंत्री पटेल का जोर


नरसिंहपुर, 12 जनवरी 2026। मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर ऐतिहासिक बरमान मेले का भव्य शुभारंभ प्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास व श्रम मंत्री ने माँ नर्मदा की पूजन-अर्चन एवं आरती के साथ किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर प्रभावशाली संदेश देते हुए कहा— “यदि हम माँ नर्मदा को माँ मानते हैं, तो अपने पुत्र धर्म को भी पूरी निष्ठा से निभाना होगा।”


मंत्री श्री पटेल ने बरमान मेले में दिखी उत्कृष्ट स्वच्छता व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पहली बार मेले में ऐसी अनुकरणीय स्वच्छता देखी है। स्वच्छता मैराथन में युवाओं की सक्रिय भागीदारी को उन्होंने बड़ी सफलता बताया। साथ ही युवा दिवस के अवसर पर के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि धर्म का वास्तविक मर्म तभी साकार होता है, जब उसे धारण करने वाला व्यक्ति सामर्थ्यवान हो।


नर्मदा संरक्षण ही सच्चा श्रृंगार

मंत्री श्री पटेल ने स्पष्ट कहा कि नर्मदा नदी की स्वच्छता हमारा सामाजिक सरोकार है। “नर्मदा का श्रृंगार यदि करना है, तो वह वृक्षारोपण से ही संभव है।” उन्होंने सभी नागरिकों से पौधरोपण का संकल्प लेने और नदी को स्वच्छ एवं अविरल बनाए रखने का आह्वान किया।


लोक संस्कृति की पहचान है बरमान मेला

कार्यक्रम में तेंदूखेड़ा विधायक ने कहा कि बरमान मेला वर्षों से क्षेत्र की लोक संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक रहा है। यहाँ श्रद्धा, भक्ति, व्यापार और मेल-मिलाप का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उन्होंने सभी से माँ नर्मदा की पवित्रता बनाए रखने और भाईचारे के साथ मेले का आनंद लेने की अपील की।

गरिमामयी उपस्थिति



इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती ज्योति नीलेश काकोड़िया, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती अनीता राजेन्द्र ठाकुर, पूर्व राज्यमंत्री श्री जालम सिंह पटेल, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व राज्यसभा सांसद श्री कैलाश सोनी, कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह, पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा, सीईओ जिला पंचायत श्री गजेन्द्र सिंह नागेश सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

👉 निष्कर्ष: बरमान मेला केवल उत्सव नहीं, बल्कि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संकल्प है—जिसे जनभागीदारी से नई ऊँचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया गया।: बरमान मेला केवल उत्सव नहीं, बल्कि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संकल्प है—जिसे जनभागीदारी से नई ऊँचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया गया।



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