मध्य प्रदेश में RTI ऑनलाइन पोर्टल बार-बार क्यों ठप?

RTI Online Portal

मध्य प्रदेश में RTI ऑनलाइन पोर्टल बार-बार क्यों ठप?
तकनीकी समस्या या जानकारी न देने की सुनियोजित व्यवस्था?

भोपाल | विशेष रिपोर्ट
भारत सरकार का RTI Online Portal एक भुगतान गेटवे आधारित आधिकारिक मंच है, जिसके माध्यम से भारतीय नागरिक केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक प्राधिकरणों से सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जानकारी मांग सकते हैं। इस पोर्टल पर आवेदन शुल्क का भुगतान एसबीआई इंटरनेट बैंकिंग, मास्टर/वीज़ा डेबिट–क्रेडिट कार्ड और रुपे कार्ड के माध्यम से किया जा सकता है।

लेकिन सवाल यह है कि मध्य प्रदेश में RTI से जुड़ी ऑनलाइन प्रक्रिया बार-बार बाधित क्यों होती है?

राज्य के कई नागरिकों और पत्रकारों का कहना है कि मध्य प्रदेश में RTI ऑनलाइन पोर्टल या उससे जुड़ी व्यवस्था अक्सर या तो खुलती ही नहीं, या फिर आवेदन और भुगतान की प्रक्रिया के दौरान तकनीकी त्रुटि दिखाकर काम बंद कर देती है। यह समस्या नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से बनी हुई है।

जब कोई समस्या बार-बार और लगातार सामने आती है, तो उसे केवल तकनीकी खामी कहकर टालना आसान नहीं होता। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह सच में तकनीकी समस्या है या फिर RTI जैसे संवैधानिक अधिकार को कमजोर करने की अप्रत्यक्ष कोशिश।

सूचना का अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। लेकिन जब ऑनलाइन पोर्टल ही सुचारु रूप से काम न करे, तो आम नागरिक सूचना कैसे मांगे, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल कैसे उठें और जवाबदेही कैसे तय होगी।

अब मध्य प्रदेश शासन से जनता कुछ स्पष्ट जवाब चाहती है। RTI ऑनलाइन पोर्टल या उससे जुड़ी व्यवस्था बार-बार बाधित क्यों होती है। यदि यह तकनीकी समस्या है, तो अब तक इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया। क्या किसी एजेंसी या अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है। यह समस्या कब तक दूर होगी और क्या कोई समय-सीमा निर्धारित है।

इसी के साथ, जनता यह भी अपेक्षा करती है कि राज्य सूचना आयुक्त महोदय इस गंभीर विषय का स्वतः संज्ञान लें और RTI ऑनलाइन व्यवस्था को सुचारु कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करें।

यदि शासन की ओर से शीघ्र और स्पष्ट जवाब नहीं आता, तो यह आशंका और मजबूत होगी कि मध्य प्रदेश में RTI को तकनीकी बहानों के जरिए अप्रभावी बनाया जा रहा है। यह केवल एक पोर्टल की खराबी का मामला नहीं है, बल्कि नागरिकों के सूचना के अधिकार और शासन की पारदर्शिता का गंभीर प्रश्न है।

सरकार की ओर से जवाब मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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