जन जातीय अस्मिता के महानायक बिरसा मुण्डा की जयंती पर बैहर मे सास्कृतिक श्रद्धांजली ।

बालाघाट
धरती आबा बिरसा के जीवन संघर्ष पर अतिथियों का प्रेरक उद्बोधन ।

मुख्य अतिथि श्रीमति अनुपमा नेताम और श्री सुरेंद्र गुड्डा मरकाम ने अपने संबोधन में कहा कि—

आज भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर हम एक ऐसे महानायक को नमन कर रहे हैं, जिन्होंने मात्र 25 वर्ष की अल्पायु में अंग्रेजी शासन को चुनौती दी और ‘अबुआ दिशुम–अबुआ राज’ का उद्घोष कर जनजातीय समाज को एकजुट किया।

उन्होंने बताया कि 1875 में झारखंड के उलीहातु में जन्मे बिरसा मुंडा ने अंग्रेज़ों के अत्याचार, जंगल-जमीन पर कब्जे और धर्मांतरण के खिलाफ व्यापक आंदोलन चलाया। उनका संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक अस्मिता की रक्षा का संघर्ष था।
उनके नेतृत्व में जनजातीय युवाओं ने अपनी पहचान बचाने, जल-जंगल-जमीन के अधिकारों को संरक्षित करने और सामाजिक आत्मसम्मान कायम रखने का प्रण लिया। उनकी विचारधारा इतनी प्रभावशाली थी कि आजादी के वर्षों बाद भी वह जनजातीय समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।

   👉       बिरसा मुंडा का संदेश - स्वबोध, एकता और जनजागरण ।
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“बिरसा मुंडा केवल इतिहास के नायक नहीं, बल्कि जनजागरण के प्रतीक हैं। उनके संदेश—स्वबोध, सामुदायिक एकजुटता, सामाजिक जागरूकता और शोषण के विरुद्ध खड़े होने का साहस—आज के युवा वर्ग के लिए मार्गदर्शक हैं।

उन्होंने सभी छात्रों और नागरिकों से अपील की कि वे बिरसा मुंडा के विचारों को जीवन में अपनाएं और उनके सपनों के आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान दें।
संगठन और परामर्शदाताओं की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम के सफल आयोजन में अनेक परामर्शदाताओं और समाजसेवियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनमें प्रमुख रूप से—👇
         सुश्री आकांक्षा तेकाम
श्री शिवनाथ यादव
                 श्री सुरेश यादव
भंवर सिंह मेरावी
             श्रीमति रेखा बिसेन
अभय यादव
              संदीप गजभिये
इनकी सक्रिय उपस्थिति और सहयोग ने कार्यक्रम को सफल और प्रभावी बनाया।
                      
मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम के छात्र-छात्राओं की बड़ी संख्या में सहभागिता ने आयोजन में नई ऊर्जा और उत्साह भर दिया।

 👉    समापन और विरासत को संजोने का संकल्प
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कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन-संदेशों को आत्मसात करने और जनजातीय संस्कृति व मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट होकर काम करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का समापन जनजातीय गीतों और जयघोषों के साथ हुआ, जिसने यह संदेश दिया कि बिरसा मुंडा की विरासत सदियों तक जनजातीय समाज का मार्गदर्शन करती रहेगी।
          जिला क्राइम रिपोर्टर - प्रताप गेडाम
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